चार वेद

चार वेद

  • ऋग्वेद – सबसे प्राचीन वेद – ज्ञान हेतु लगभग १० हजार मंत्र। इसमें देवताओं के गुणों का वर्णन और प्रकाश के लिए मन्त्र हैं – सभी कविता-छन्द रूप में।
  • सामवेद – उपासना में गाने के लिये संगीतमय मन्त्र हैं – १९७५ मंत्र।
  • यजुर्वेद – इसमें कार्य (क्रिया), यज्ञ (समर्पण) की प्रक्रिया के लिये गद्यात्मक मन्त्र हैं- ३७५० मंत्र।
  • अथर्ववेद-इसमें गुण, धर्म,आरोग्य,यज्ञ के लिये कवितामयी मन्त्र हैं – ७२६० मंत्र। इसमे जादु-टोना की, मारण, मोहन, स्तम्भन आदि से सम्बद्ध मन्त्र भी है.

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