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३३ करोड़ देवताओंका मिथ्य

‘ कोटी  ‘  शब्द  का एक अर्थ अगर ‘ करोड़ ‘ है  तो दूसरा  अर्थ  है ‘ प्रकार ‘ .

जैसे हम कहते है कि  वह इंसान उच्च कोटी   का है. आधुनिक काल के विद्वानों ने देवताओं  के संदर्भ  में कोटी  का अर्थ  करोड़ कर दिया. असल में यहाँ  कोटी  शब्द का अर्थ ” प्रकार ” याने ३३ प्रकार के देवता  है .

कुल 33 प्रकार के  देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12  आदित्य  

धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु…!

8 वसु  :-
धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 रूद्र  :- 
हर, बहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ
२ अश्विनी कुमार  : –

 नासत्य और  द्स्त्र

ईस प्रकार कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी (प्रकार ) के देवी देवता होतें  हैं !

यह सभी देवताओं के प्रकार हर पुराणों में वर्णित हैं। 

शिव पुराण – जानें कहानियों के जरिये विज्ञान

 

http://isha.sadhguru.org/blog/hi/yog-dhyan/yog-gatha/shiv-puran/

हिंदू संस्कृति में पुराणों की चर्चा खूब मिलती है। इन्हीं पुराणों में से एक है – शिव पुराण। तो क्या है इस पुराण में – सिर्फ कहानियां या कहानियों के जरिए कुछ और बताने की कोशिश की गई है?

शिव पुराण – कहानी के पीछे क्या है विज्ञान?

अगर आप शिव पुराण की कहानियों पर ध्यान दें, तो आप देखेंगे कि इनमें सापेक्षता के सिद्धांत, क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांत – पूरी आधुनिक भौतिकी – को बहुत खूबसूरती से कहानियों के  जरिये अभिव्यक्त किया गया है। यह एक तार्किक संस्कृति है, इसमें विज्ञान को कहानियों के जरिये व्यक्त किया गया था।

शिव पुराण मानव प्रकृति को चेतना के चरम तक ले जाने का सर्वोच्च विज्ञान है, जिसे बहुत सुंदर कहानियों द्वारा किया गया है। योग को एक विज्ञान के रूप में व्यक्त किया गया है, जिसमें कहानियां नहीं हैं, लेकिन अगर आप गहन अर्थों में उस पर ध्यान दें, तो योग और शिव पुराण को अलग नहीं किया जा सकता। एक उनके लिए है, जो कहानियां पसंद करते हैं तो दूसरा उनके लिए है, जो हर चीज को विज्ञान की नजर से देखना चाहते हैं, मगर दोनों के लिए मूलभूत तत्व एक ही हैं।

आजकल, वैज्ञानिक आधुनिक शिक्षा की प्रकृति पर बहुत शोध कर रहे हैं। एक चीज यह कही जा रही है कि अगर कोई बच्चा 20 साल की औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद व्यावहारिक दुनिया में प्रवेश करता है, तो उसकी बुद्धि का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है, जिसे वापस ठीक नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि वह बहुत ज्ञानी मूर्ख में बदल जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शिक्षा देने का एक बेहतर तरीका है, उसे कहानियों या नाटक के रूप में प्रदान करना। इस दिशा में थोड़ी-बहुत कोशिश की गई है, मगर दुनिया में ज्यादातर शिक्षा काफी हद तक निषेधात्मक रही है। जानकारी का विशाल भंडार आपकी बुद्धि को दबा देता है, जब तक कि वह एक खास रूप में आपको न दिया जाए। कहानी के रूप में शिक्षा प्रदान करना बेहतरीन तरीका होगा। इस संस्कृति में यही किया गया था। विज्ञान के सर्वोच्च आयामों को बहुत बढ़िया कहानियों के रूप में दूसरे लोगों को सौंपा गया।

[ यह जानकारी  ईशा ब्लॉग से ली गई है. ऊपर लिंक share की है   ]

 

१८ पुराण

 

पुराण वस्तुतः वेदों का विस्तार हैं.  वेदव्यास जी ने पुराणों की रचना और पुनर्रचना की. पुराण मनुष्य को धर्म एवं नीति के अनुसार जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देते हैं.

पुराण अठारह हैं।

  1. ब्रह्म पुराण
  2. पद्म पुराण
  3. विष्णु पुराण
  4. वायु पुराण — (शिव पुराण)
  5. भागवत पुराण — (देवीभागवत पुराण)
  6. नारद पुराण
  7. मार्कण्डेय पुराण
  8. अग्नि पुराण
  9. भविष्य पुराण
  10. ब्रह्म वैवर्त पुराण
  11. लिङ्ग पुराण
  12. वाराह पुराण
  13. स्कन्द पुराण
  14. वामन पुराण
  15. कूर्म पुराण
  16. मत्स्य पुराण
  17. गरुड़ पुराण
  18. ब्रह्माण्ड पुराण

 

 

चार वेद

चार वेद

  • ऋग्वेद – सबसे प्राचीन वेद – ज्ञान हेतु लगभग १० हजार मंत्र। इसमें देवताओं के गुणों का वर्णन और प्रकाश के लिए मन्त्र हैं – सभी कविता-छन्द रूप में।
  • सामवेद – उपासना में गाने के लिये संगीतमय मन्त्र हैं – १९७५ मंत्र।
  • यजुर्वेद – इसमें कार्य (क्रिया), यज्ञ (समर्पण) की प्रक्रिया के लिये गद्यात्मक मन्त्र हैं- ३७५० मंत्र।
  • अथर्ववेद-इसमें गुण, धर्म,आरोग्य,यज्ञ के लिये कवितामयी मन्त्र हैं – ७२६० मंत्र। इसमे जादु-टोना की, मारण, मोहन, स्तम्भन आदि से सम्बद्ध मन्त्र भी है.

!! !! !! ॐ गं गणपतये नमः !! !! !!

श्री गणपति , शिव की एनर्जी , याने cosmic energy  जो पृथ्वी पर आती है  उसे संतुलित करके आगे पृथ्वी पर भेज देते है.
गणपति अथर्वशीर्ष
अथर्व का अर्थ है शांति. शीर्ष का अर्थ है  मस्तक, मेंदु  या फिर  brain.  तो अथर्वशीर्ष का मतलब होता है  दिमाग़ की शांति. अथर्वशीर्ष यह एक ऐसा स्तोत्र है जो दिमाग़ में शांति पैदा कर देता है.                  

हिन्दु क्या है

“ नमस्कार..! ”

अगर आपसे पूछा जाए कि आप हिन्दु है मतलब क्या है..? कोई कहेगा हम शिव, विष्णु या दुर्गा माँ को मानते है मतलब हिन्दु है, तो कोई कहेगा कि हिन्दु मतलब  मूर्तिपूजा और अनेको कर्मकांड, मंत्र इन सब में विश्वास रखने वाले इंसान. हर किसी की अपनी परिभाषा होगी. मेरे विचार से वैदिक जीवन जीने का तरीक़ा याने हिन्दु. यह वैदिक जीवन शैली बहुत ही प्रगत और  शास्त्रोक्त थी.  हर रीति, परंपरा या कर्म के पीछे  कुछ ना कुछ विज्ञान था. यह सारा ज्ञान हमें वेद पुराणों से मिला है. उसमें से कई बातें आज के विज्ञान से मेल खाती है. उसी ज्ञान को आपके सामने रखने का यह प्रयास है.

संजाली